राग बाल यौन शोषण पर ?क हालिया सर?वेक?षण का ज़िक?र कर रहे हैं, जिसके नतीजे चौंकाने वाले हैं.
अभी हाल के 17000 बच?चों के सर?वेक?षण में करीब 50% से ज?यादा बच?चों ने ये कबूल किया कि उनका यौन शोषण कभी ना कभी ना किया गया है। ये यौन शोषण परिवार में, किसी उम?र से बड़े मित?र द?वारा, किसी बस या ट?रेन में, या किसी आयोजन में होता है। कभी कभी बच?चे ?सा होने पर स?भल जाते हैं, और कभी कभी ?से बच?चों के मानसिक संत?लन पर काफी असर पड़ सकता है। [...] मा? बाप से ये उम?मीद रहेगी कि वे अपने बच?चों को समय से उचित यौन शिक?षा दें। और ?सी शिक?षा देने से पहले ख?द भी क?छ पढ़ लें। गलत शिक?षा और मूर?खतापूर?ण पूर?वाग?रह और भी खतरनाक होते हैं।
यौन शिक?षा के सवाल को आगे बढ़ाते ह?? रवीश कहते हैं.
सवाल है कि चोरी छ?पे औरतों में ?ांकने वाला हिंद?स?तानी मर?द किताबों में इसे पढ़कर परिपक?व और संत?लित होना चाहता है या नहीं? और इन बेवकूफ मर?दों की अज?ञानता की कीमत औरतें कब तक च?काती रहेंगी। सेक?स शिक?षा का स?वागत किया जा?। हमारी सभ?यता संस?कृति ने बह?त संकट देखे। इसका क?छ नहीं होगा।
मेरे ख़याल से हमें ?क समाज के तौर पर अब ‘सेक?स शिक?षा हा? या नहीं’ के सवाल से आगे बढ़ना चाहि?. बहस के सवाल ‘हा?’ के बाद के हों, जैसे किसके द?वारा (मा?-बाप, शिक?षक), कब (किस उम?र में) और कितनी (कितने विस?तार तक)?









Comments
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Ramashankar Sharma
Apr 11th, 2007 at 12:53 am | #
बेहतरीन म?द?दा उठाया है. इस बारे में बच?चों से सेक?स चर?चा पर पहले ही लिख च?का हूं. ?क नजर इसमें डालें http://sexkya.blogspot.com/2007/01/blog-post.html
रही बात स?कूलों में सेक?स शिक?षा की तो इस पर मेरी राय अभी ना है. इसके लिये व?यापक शोध की आवश?यकता है वह भी हम आप ही नहीं पूरे समाज की व सरकार की. फिर भी आप भी प?रयास करें यहीं से शायद कोई दिशा निकले.